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रविवार, 14 नवंबर 2021

बाल दिवस



 

ये फोटो लगभग ३-४ वर्ष पुरानी है। जब अपने ननिहाल रामगढ़ गया था। वहीं समीप में जानकी कुंड नामक एक स्थान है। ये छोटे बच्चे वहीं मछलियाँ पकड़ रहे थे। इनके माता-पिता भी वहीं थे। मैंने इनके स्कूल के बारे में पूछना चाहा तो इनके पिता के कहा कि “भैया सुबह मजदूरी करते हैं और शाम तक ये तय नहीं रहता कि सुबह का पैसा मिलेगा भी या नहीं, ऐसी स्थिति में भला ये कैसे स्कूल जाएँगे?”  सरकार द्वारा शिक्षा के लिए बनाई गई तमाम योजनाएँ सिर्फ और सिर्फ काग़ज़ों पर देखने के लिए ही होती हैं। अदम गोंडवी ने लिखा भी है -

'तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है।'
'मगर ये आँकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है।'

यहाँ की व्यवस्था उन सभी योजनाओं को पूँजीपतियों की झोली में डालती है। अगर आज के दौर में भी हम इन बच्चों को स्कूलों और किताबों से दूर रखेंगे तो देश की उन्नति निश्चित ही अंधकार से भरी दिशा की ओर चली जाएगी। हालाकि मैं कभी किसी विशेष जाति या समुदाय की बात नहीं करता पर इन दिनों सरकार अपने वोट बैंक के लिए जाति धर्म का अच्छा-खासा उपयोग कर रही है। इसीलिए यहाँ यह भी सूचित कर दूँ कि इस फोटो में दिख रहे दोनों बच्चे आदिवासी हैं। १५ नवंबर को बिरसा मुंडा जयंती पर आदिवासियों के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित होना हैं। भले ही सरकार अपने फायदे के लिए ये कार्य करे किंतु आशा है रामगढ़ (सतना) के इन बच्चों के साथ साथ देश के ऐसे तमाम उन बच्चों को भी वो शिक्षा और सुविधाएँ मिलेंगी जिसके वो हकदार हैं। तभी ऐसे प्रत्येक कार्यक्रम करना सार्थक और सफल होगा। अपनी अप्रतिम नवल चेतना से देश का भविष्य निर्धारित करने वाले नन्हें बच्चों से ही आने वाली पीढ़ी को ज्ञान और विज्ञान की दिशा में खासा उम्मीदे हैं। देश के न जाने कितने नौनिहालों ने बेहद कम उम्र में वैश्विक स्तर पर अपने हुनर का पताका फहराया है। सभी बच्चों को बाल दिवस की असंख्य शुभकामनाएँ।
~ प्रिय
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