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शनिवार, 2 मई 2026

बघेली ग़ज़ल - दतनिपोर है कक्‍का ।। Bagheli Ghazal - Datnipor hai Kakka

   बघेली ग़ज़ल 
दतनिपोर है कक्‍का

लड़िका खासा गोर है कक्का।
लेकिन  दतनिपोर  है कक्का।

नेताजी अब उचयं न घर से,

का उनखे बरतोर है कक्का ?


गरीब के बिटिया पढ़ैं लाग ही,

गॉंव  भरे  मा सोर  है कक्का।


तुम्हरे  घर  मा  घुप्प  मचा है,

उनखे खूब अंजोर है कक्का।


बोट दिहा तुम आसवं जेखा,

पता चला व  चोर है  कक्का। - कवि प्रियांशु प्रिय सतना ( मध्‍यप्रदेश )

बघेली ग़ज़ल - दतनिपोर है कक्‍का ।। Bagheli Ghazal - Datnipor hai Kakka

   बघेली ग़ज़ल  दतनिपोर है कक्‍का लड़िका खासा गोर है कक्का। लेकिन  दतनिपोर  है कक्का। नेताजी अब उचयं न घर से, का उनखे बरतोर है कक्का ? गरीब ...