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शनिवार, 25 अप्रैल 2020

एक प्रेरक कहानी ~ शरत चंद्र चट्टोपाध्याय


शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय ( 15 सितंबर 1876 - 16 जनवरी 1936 ) बांग्ला के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार एवं लघुकथाकार थे। वे बांग्ला के सबसे लोकप्रिय उपन्यासकार हैं।उनकी अधिकांश कृतियों में गाँव के लोगों की जीवनशैली, उनके संघर्ष एवं उनके द्वारा झेले गए संकटों का वर्णन है। इसके अलावा उनकी रचनाओं में तत्कालीन बंगाल के सामाजिक जीवन की झलक मिलती है। शरतचंद्र भारत के सार्वकालिक सर्वाधिक लोकप्रिय तथा सर्वाधिक अनूदित लेखक हैं।
प्रस्तुत कहानी उनकी कृति "शरतचंद्र की प्रेरक कथाएँ" से ली गई है। "राजू का साहस" कहानी में कथाकार बताते हैं कि जीवन में कितना भी कठिन समय आ जाए परंतु अपना साहस कभी नहीं खोना चाहिए। साथ ही जीवन में प्रत्येक व्यक्ति की मदद करनी चाहिए। स्वयं के भीतर भय को पैदा करके मनुष्य कभी सफलता नहीं पा सकता और निर्भीक होकर हर एक काम करने से मनुष्य कठिन परिस्थितियों में  भी विजयी होता है। कहानी में यह भी देखने को मिलता है कि जब घर के सदस्य वृद्ध हो जाते हैं  तो उनके परिवार वालों को उनसे घृणा सी होने लगती है और वो उन पर बिल्कुल भी ध्यान न देकर स्वयं की दुनियाँ में मग्न रहते हैं। तो आइए सुनते हैं कहानी.............


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बघेली ग़ज़ल - दतनिपोर है कक्‍का ।। Bagheli Ghazal - Datnipor hai Kakka

   बघेली ग़ज़ल  दतनिपोर है कक्‍का लड़िका खासा गोर है कक्का। लेकिन  दतनिपोर  है कक्का। नेताजी अब उचयं न घर से, का उनखे बरतोर है कक्का ? गरीब ...