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सोमवार, 26 नवंबर 2018

एक शाम मतदाताओं के नाम - ( कवि सम्मेलन )

'एक शाम मतदाताओं के नाम' 
 ( कवि सम्मेलन )

दिनांक - 25 नवंबर 2018....

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री राहुल जैन जी के संयोजन एवं उपस्थिति में मतदाता जागरूकता अभियान की सतत कड़ी में गत दिनों सिविल लाइन सतना स्थित चौपाटी में भव्य एवं गरिमामय उपस्थित में "एक शाम मतदाताओं के नाम" का आयोजन किया गया।विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही स्थानीय लोक भाषा बघेली को प्राथमिकता देते हुए जिले के नामवर बघेली रचनाकारों को शाल एवं श्रीफल से सम्मानित कर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।कवि सम्मेलन में बघेली के शीर्ष कवि पद्मश्री बाबूलाल दाहिया,सूर्यभान कुशवाहा, रमेश सिंह जाखी,शैलेन्द्र शैल,जगदीश तिवारी, डा.रामयश बागरी,प्रियांशु कुशवाहा ने अपनी काव्य प्रस्तुति से मध्य प्रदेश में आगामी 28 नवम्बर को होने वाले मतदान के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।इस अवसर पर नगर पालिक निगम सतना के आयुक्त प्रणीण सिंह अढ़ायच सहित पूरा प्रशानिक अमला उपस्थित रहा।संचालन रविशंकर चतुर्वेदी जी ने किया

> प्रियांशु कुशवाहा "प्रिय"
     मो. 9981153574











25 नवंबर 2018....

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री राहुल जैन जी के संयोजन एवं उपस्थिति में मतदाता जागरूकता अभियान की सतत कड़ी में गत दिनों सिविल लाइन सतना स्थित चौपाटी में भव्य एवं गरिमामय उपस्थित में "एक शाम मतदाताओं के नाम" का आयोजन किया गया।विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही स्थानीय लोक भाषा बघेली को प्राथमिकता देते हुए जिले के नामवर बघेली रचनाकारों को शाल एवं श्रीफल से सम्मानित कर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।कवि सम्मेलन में बघेली के शीर्ष कवि पद्मश्री बाबूलाल दाहिया,सूर्यभान कुशवाहा, रमेश सिंह जाखी,शैलेन्द्र शैल,जगदीश तिवारी, डा.रामयश बागरी,प्रियांशु कुशवाहा ने अपनी काव्य प्रस्तुति से मध्य प्रदेश में आगामी 28 नवम्बर को होने वाले मतदान के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।इस अवसर पर नगर पालिक निगम सतना के आयुक्त प्रणीण सिंह अढ़ायच सहित पूरा प्रशानिक अमला उपस्थित रहा।संचालन रविशंकर चतुर्वेदी जी ने किया

> प्रियांशु कुशवाहा "प्रिय"
     मो. 9981153574






बघेली ग़ज़ल - दतनिपोर है कक्‍का ।। Bagheli Ghazal - Datnipor hai Kakka

   बघेली ग़ज़ल  दतनिपोर है कक्‍का लड़िका खासा गोर है कक्का। लेकिन  दतनिपोर  है कक्का। नेताजी अब उचयं न घर से, का उनखे बरतोर है कक्का ? गरीब ...