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सोमवार, 24 मार्च 2025

हिंदुस्‍तानी सैनिक पर बघेली कविता

 हिंदुस्‍तानी सैनिक पर बघेली कविता 

सीमा मा जे डटे लाग हें,भारत माता के लै नाम।
हाथ जोड़िके उई सैनिक का,बारंबार प्रनाम।

महतारी के ममिता छाड़िन,बहिनी केर पियार।
देश के रक्षा करैं के खीतिर, होइगे हें तैयार ।

जीरो डिगरी तापमान मा,रात रात भर पहरा।
हाथ गोड़ सब ठिठुर जाय,या परै गजब के कोहिरा।

हिम्मत कबौ न हारै फौजी,आपन फरिज निभामै।
आखी कउनौ काढ़ै दुश्मन,चट्टै धूल चटामैं।

घर दुआर जब त्यागिन आपन ,लगी दाव मा जान।
बड़े चैन से तबहिन सोबा आपन हिन्दुस्तान ।

सीमा मा बैरिन के लाने,खड़े है बनिके काल।
तनी रहैं बंदूखै हरदम,चलै जो कउनौ चाल।

धन्य हेमे उई बाप हो भाई धन्य हिबै महतारी।
जन्म दिहिस अइसन लड़िकन,करथें रक्षाकारी।

कहैं प्रियांशु फौजी साथी,नमन है तुम्ही सपूत।
माथे मा रज धूल धराके,सेवा करै अकूत।

- कवि प्रियांशु ' प्रि‍य' 

बघेली ग़ज़ल - दतनिपोर है कक्‍का ।। Bagheli Ghazal - Datnipor hai Kakka

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