तुम्हारी याद
जब उगता है सुबह का सूरज,
सावन के मौसम में खिलते हैं फूल,
मां के पुचकारने पर,
मुस्कुराता है नन्हा बच्चा,
कितना खूबसूरत लगता है, यह सब देखना।
बहुत खुश होता हूं मैं और,
याद आती है तुम्हारी......
शाम होते-होते डूबने लगता है सूरज,
मुरझा जाते हैं सारे फूल,
जब होता है पतझड़ का प्रवेश,
किसी कारण रोने लगता है बच्चा,
तब भी याद आती है तुम्हारी......
अगर देखकर खूबसूरत तितलियां,
तुम्हारी याद आए,
और सूखी हुई नदी देखकर,
ये मन सबकुछ भूल जाए।
तो हक नहीं है मुझे तुम्हें प्रेम करने का,
- कवि प्रियांशु प्रिय
(कविता लेखन- 25.10.26)
