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रविवार, 9 फ़रवरी 2020

बघेली कविता || मसका खीर || कवि सैफुद्दीन "सैफू" जी ||


बघेली कविता ~
 [ मसका खीर ]

महंगाई और भ्रष्टाचार में जी रहे आम आदमी का जीवन कौन कौन सी कठिन परिस्थितियों से गुज़रता है...सुनिए #सैफू जी की बघेली व्यंग्य कविता में... "मसका खीर"

पानी मिलाय के दूध, बिकै अब गली गली,
दादा य भउसा देख, भला कै रोज चली।
दादू य मसका खीर, चली जै रोज चली।।
~ सैफू जी

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