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रविवार, 5 जनवरी 2025

यातायात के नियम पर कविता

यातायात पर बघेली कविता


भरर भुरुर अउ परर पुरुर तुम, अस गाड़ी भरउत्या है।
हाथ गोड़ टोरबाए भाई, रसपताल मा अउत्या है।

कालेजन से निकर्या भइलो,एक्सीलेटर पेल्या।
देखिके बिटियन काहीं गाड़ी, अधाधुंध तुम रेल्या।
बने रह्या तुम हैवी ड्राइवर, छाने‌ अद्धी पउआ।
रसपताल के फेर दवाई, चली‌ एक एक झउआ।।
हेलमेट नहीं बेसाह्या अबतक, खुल्ला मूड़ चलाया।
दुर्घटना का दिहा तू नेउता, आपन जान गबाया।।
मन‌ई धरन चलाबा भाई, गाड़ी अउ स्कूटी ।
नहीं त निपुरी थुथून थोभरा, हाथौ गौड़ौ टूटी।।
यातायात के नियम कायदा, ल्या तू सगला जान।
नहीं जो फसिहा चौराहा मा, कटबै करी चलान।।
लाल पियर हरियर बत्ती सब, देखे रह्या सचेत।
कबय रूकैं का, कबै चलय का, देती हैं संकेत।
धीम कइ लिहा गाड़ी आपन, जली जो पीली बत्ती।
लाल‌ लाल जो लाइट चमकी, बड़्या न एकव रत्ती।
जब रस्ता होई खाली एकदम, निकरैं केर तयारी।
हरियर बत्ती जली हो भैया, ट्रैफिक‌ लाइट निहारी।।
कहैं प्रियांशु सुना फलाने, मोर बात अब माना।
गाड़ी बाहन खूब चलाबा,नियम जो सगले जाना। 

- कवि प्रियांशु 'प्र‍िय' 

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